Tuesday, November 6, 2012

अनायास...(आशु रचना)


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आस
और
प्यास
हुई थी
घटित
अनायास,
गिर गए थे
आवरण
जीते थे
एहसास,
तुम और मैं
बन गए थे
हम,
नीचे थी
जमीं
ऊपर
आकाश !

1 comment:

  1. तुम और मैं
    बन गए थे
    हम,
    नीचे थी
    जमीं
    ऊपर
    आकाश !

    वाह - वाह

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