Tuesday, March 6, 2012

म्हारे मनडे री आस......(राजस्थानी)

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जोवां थांरी म्हे तो उभा बाटड़ल्यां
म्हारा हिंवडे रा हार
म्हारा जीवण सिणगार
बेगा बेगा आय ने , अंग लगाओ म्हारा राज...

प्रीत आपणी जाणे इमरत ज्यूँ मधुर
म्हारे नैणा रा मिठास
म्हारे मनडे री आस
आप आयां/ सब मधरो होसी आओ म्हारा राज....

बोलो जद थे मीठो जाणे र'स भरै
म्हारे दिल रा करार
म्हारे बागां री बहार
इण सूखे बागां/ रौनक क्यूँ ना/ ल्यावो म्हारा राज..

सावणियो बरस्यो है, जाणे जुग बित्याँ
म्हारी मेघ मल्हार
म्हारी सुर झीणकार
गीत हेत रा गाय/ च्यानणी छळकी /म्हारा राज...


( राजस्थानी गीत : म्हे तो थांरा डेरा निरखण आया सा...से तर्ज़ मिलायी जा सकती है.)

(इसमें छन्द मात्रा के लिहाज़ से कुछ सुधार हो सकते हैं)

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