Wednesday, November 4, 2009

मनुज........(Ashu Post)

...

मनु
जब कहते हैं
मानव को,
पुकारते हो
बार बार
क्यों
मुझे
मनुज कह कर......
मैं
मनुष्य की ही तो
संतान हूँ
किसी चौपाये
अथवा
कीड़े की नहीं
क्या तुम्हारी
दीठ ने भी
पीठ
मोड़ ली है ?

आकाशवाणी हुई
तुम्हे
मनुज कह कर
स्मरण दिलाया
जा रहा है
सृजन का
संस्कार का
संवेदना का
और
यह भी बताया
जा रहा है
तुम हो परिणाम
मिलन का
एक मानव और
मानवी के
जो
हुआ था इसी
धरा पर
कभी ना समझो
स्वयम्भू
प्रभु
इस तन को
इस मन को
जिसे
बनाना है
मानव
दानव या
परमात्मा
तुझको......

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