Friday, August 28, 2009

शायरी..........

जुबां की ताक़त को
तोलने की
तराजू है शायरी
अलफाज़ के गठ्ठर में
चन्दन की
लकड़ी है शायरी...........

सच है सौ फी सदी
ना नयी है
ना ही पुरानी है शायरी
इन्सां के जिगर में
सुलगते अंगार की
दहकती सी
निशानी है शायरी......

गूंगे का गुड़ है
इल्म का है जरिया
दंगल का कोई
अखाड़ा नहीं है शायरी
दवा है रुह की
जिस्म की
खुराक नहीं है शायरी......

No comments:

Post a Comment